मृत्यु के बाद केसीसी लोन का क्या होता है, जाने नियम

मृत्यु के बाद केसीसी लोन का क्या होता है

कृषि-पशुपालन-डेरी बिजनेस से जुड़े किसानों के लिए केसीसी से लोन लेना पहले से अब काफी आसान हो चुका है। इसमें 3 लाख तक ऋण प्राप्त किया जा सकता है जिसकी ब्याज दरों पर सरकार सब्सिडी देती है। इस पोस्ट में हम बात करने जा रहे हैं कि यदि किसी केसीसी लोन लेने वाले व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो ऐसे स्थिति में उसके द्वारा लिए गए ऋण का क्या होगा, इसके नियम क्या क्या हैं –

मृत्यु के बाद केसीसी लोन का क्या होता है

यदि केसीसी लोन धारक की मृत्यु हो जाती है, तो ऐसी स्थिति में बीमा क्लेम के जरिए केसीसी की रकम की कवरेज की जाती है। बीमा क्लेम की राशि किसान के नॉमिनी को दी जाती है। यदि किसान ने कोई नॉमिनी नहीं बनाया है, तो ऐसी स्थिति में बीमा क्लेम की राशि किसान के कानूनी वारिस को दी जाती है।

अगर किसान ने केसीसी लोन के लिए कोई बीमा नहीं कराया है, तो ऐसी स्थिति में बैंक या वित्तीय संस्थान किसान के परिजनों से संपर्क करती है और उन्हें नोटिस आदि भेजती है। किसान परिवार की सहूलियत के हिसाब से लोन की रकम का सेटलमेंट हो जाता है। इसके अलावा, लोन की रकम के लिए किसान की ओर से दी जमीनत को नीलाम करने का भी नियम है।

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क्या है योजना –

किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card) योजना भारत सरकार द्वारा किसानों को कृषि कार्यों के लिए ऋण प्रदान करने के लिए शुरू की गई एक योजना है। इस योजना के तहत किसानों को 5 साल की अवधि के लिए 3 लाख रुपये तक का ऋण 4% ब्याज दर पर दिया जाता है। इस ऋण के साथ-साथ किसान को दुर्घटना बीमा योजना की कवरेज भी दी जाती है।

केसीसी लोन के भुगतान से जुड़े नियम –

  • अगर किसान ने केसीसी लोन के लिए बीमा कराया है, तो बीमा क्लेम के जरिए लोन की रकम पूरी तरह से चुक जाती है।
  • अगर किसान ने केसीसी लोन के लिए कोई बीमा नहीं कराया है, तो ऐसी स्थिति में बैंक या वित्तीय संस्थान किसान के परिजनों से संपर्क करती है और उन्हें नोटिस आदि भेजती है।
  • किसान परिवार की सहूलियत के हिसाब से लोन की रकम का सेटलमेंट हो जाता है।
  • लोन की रकम के लिए किसान की ओर से दी जमीनत को नीलाम करने का भी नियम है।

सारांश –

किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card) योजना एक महत्वपूर्ण योजना है, जो किसानों को कृषि कार्यों के लिए ऋण प्रदान करती है। अगर किसान केसीसी लोन लेते हैं, तो उन्हें बीमा कराना चाहिए, ताकि उनकी मृत्यु के बाद उनके परिवार को लोन की रकम के लिए परेशानी न हो।

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