ऋण से जुड़ी खबरें, नए साल में लोन लेना होगा महंगा? ब्याज दरें हुई अब इतनी

ऋण यानी लोन एक वित्तीय लेनदेन है जिसमें एक व्यक्ति या संस्था दूसरे व्यक्ति या संस्था को पैसे (money) उधार देती है। ज्यादातर लोग ऋण लेने के बाद, अपनी कुछ जरुरी आवश्यकताओं जैसे कि घर खरीदना, कार खरीदना, शिक्षा प्राप्त करना, या व्यवसाय आदि में पैसों की जरुरत को पूरा करते हैं। भारत में ऋण एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। सरकार द्वारा किसानों, छात्रों, और अन्य लोगों को ऋण प्रदान करने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। समय समय पर रिज़र्व बैंक द्वारा रेपोरेट में बदलाव किया जाता है जिसके कारण कई जरूरी न्यूज़ व बैंकिंग ख़बरें जाननी जरुरी होती हैं। इस पोस्ट में हमने ऋण से जुड़ी कुछ महत्त्वपूर्ण ख़बरों की जानकारी दी है –

ऋण से जुड़ी नई खबरें (अप्रैल 2024) –

ब्याज दरों में बदलाव:

  • 1 अप्रैल 2024 से, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपने बेस रेट और लोन पर लगने वाले ब्याज दरों में 0.25% की वृद्धि की। इसका मतलब है कि होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन सहित सभी प्रकार के ऋणों के लिए ब्याज दरें अब अधिक होंगी।
  • अन्य बैंकों ने भी एसबीआई के रुख का अनुसरण करते हुए अपनी ब्याज दरों में वृद्धि की है।

कृषि ऋण:

  • सरकार ने किसानों को खरीफ फसल 2024 के लिए ऋण लेने में मदद करने के लिए 2.5 लाख करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की घोषणा की है।
  • इस पैकेज के तहत, किसानों को रियायती ब्याज दरों पर ऋण मिलेगा।

मुद्रा ऋण योजना:

  • सरकार ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के तहत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को ऋण प्रदान करने के लिए 10 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है।
  • इस योजना के तहत, ऋण आसानी से उपलब्ध कराया जाता है और इसमें कम कागजी कार्रवाई होती है।

अन्य खबरें:

  • भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने क्रेडिट कार्ड और डिजिटल ऋणों पर सख्त नियम लागू किए हैं।
  • इन नियमों का उद्देश्य ऋण लेने वालों को अधिक सुरक्षा प्रदान करना और ऋणदाताओं द्वारा अनुचित प्रथाओं को रोकना है।
  • कई बैंक अब ग्राहकों को ऋण पर विशेष छूट और ऑफ़र दे रहे हैं।

ऋण की ब्याज दरें घटती बढती क्यों हैं?

लोन ब्याज दरें कई कारकों से प्रभावित होती हैं –

  1. जब महंगाई बढ़ती है, तो बैंकों को अपनी बचत पर अधिक ब्याज दर देनी पड़ती है। इससे बैंकों को ऋण देने पर अधिक जोखिम होता है, इसलिए वे ऋण की ब्याज दरें बढ़ा देते हैं।
  2. जब बेरोजगारी बढ़ती है, तो लोगों की आय कम हो जाती है। इससे लोगों को ऋण चुकाना मुश्किल हो जाता है, इसलिए बैंक ऋण की ब्याज दरें बढ़ा देते हैं।
  3. राजनीतिक अस्थिरता भी ऋण की ब्याज दरों को प्रभावित करती हैं इससे बैंकों के वित्तीय संकट पर प्रभाव पड़ता है।

बैंक के लोन वितरण व ब्याज दरों पर कौन नियंत्रण करता है?

भारत में, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ऋण की ब्याज दरों को नियंत्रित करता है। RBI रेपो दर को बढ़ाकर या घटाकर ऋण की ब्याज दरों को प्रभावित कर सकता है। रेपो दर वह दर है जिस पर RBI बैंकों को धन उधार देता है।

ऋण की ब्याज दरें बढ़ने से क्या होगा?

ब्याज दरें बढ़ने से लोगों और व्यवसायों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इससे लोगों को ऋण चुकाना मुश्किल हो सकता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो सकती है। इससे व्यवसायों को भी अधिक ब्याज देना पड़ सकता है, जिससे उनकी लागत बढ़ सकती है।

इसलिए, ऋण की ब्याज दरों में वृद्धि से बचने के लिए लोगों को ऋण लेने से पहले सावधानी से विचार करना चाहिए। ऋण लेने से पहले अपनी आय और खर्चों का आकलन करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे ऋण चुकाने में सक्षम होंगे।

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